Monday, July 5, 2010

Nahin chuni maine yeh jameen ..

नहीं चुनी मैंने ये ज़मीन जो वतन ठहरी
नहीं चुना मैंने वो घर जो खानदान बना
नहीं चुना मैंने वो मज़हब जो मुझे बख्शा गया
नहीं चुनी मैंने वो जुबां जिसमें माँ ने बोलना सिखाया
और अब मैं इन सब के लिए तैयार हूँ
मरने
मारने पर ....

-- फज़ल ताबिश

Jaanewalon se rabta rakhana ..

जानेवालो से राब्ता रखना
दोस्तो रस्म-ए-फातिहा रखना

घर की तामीर चाहे जैसी हो
इसमें रोने की कुछ जगह रखना

मस्जिदें हैं नमाजियो के लिए
अपने घर में कहीं खुदा रखना

जिस्म में फैलने लगा है शहर
अपनी तन्हाईयाँ बचा रखना

उमर करने को है पचास को पार
कौन है किस जगह पता रखना


--निदा फाज़ली

Bandagi humne ...

बंदगी हमने छोड़ दी हैं फ़राज़ 
क्या करे लोग जब खुदा हो जाये |
-- फ़राज़  

Akl pe hum ko naaz ..

अक्ल पे हम को नाज़ तो बहुत था लेकिन, 
इश्क के हाथो ये भी होगा कि लोग हमें समझायेंगे .. |

-- अहमद हमदानी

Koi yaad aaya savere savere ..

कहेता था कल शब् संभालना-संभालना 
वही लडखडाया सवेरे-सवेरे  

कटी रात सारी मेरी मैकदे में 
खुदा याद आया सवेरे-सवेरे


-- सैयद राही

Na pucch dil ki haqiqat magar ..

न पूछ दिल कि हकीक़त मगर ये कह दे 
वोह बेकरार रहे ; जिसने बेकरार किया .. |

-- दाग दहेलवी

Sunday, July 4, 2010

Har ek saans na jaane thi justju kiski ..

हर एक साँस न जाने थी जुस्तजू किसकी 
हर एक दयार मुसाफिर को बेदयार मिला ,

यह शहर हैं कि नुमाइश लगी हुयी हैं कोई 
जो आदमी भी मिला बनके इश्तिहार मिला |

-- निदा फ़ाज़ली