हर एक साँस न जाने थी जुस्तजू किसकी
हर एक दयार मुसाफिर को बेदयार मिला ,
यह शहर हैं कि नुमाइश लगी हुयी हैं कोई
जो आदमी भी मिला बनके इश्तिहार मिला |
-- निदा फ़ाज़ली
हर एक दयार मुसाफिर को बेदयार मिला ,
यह शहर हैं कि नुमाइश लगी हुयी हैं कोई
जो आदमी भी मिला बनके इश्तिहार मिला |
-- निदा फ़ाज़ली
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